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    इंटीरियर डिजाइनिंग क्या है? कोर्स, फीस, करियर और सैलरी
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    • इंटीरियर डिजाइनिंग क्या है? कोर्स, फीस, करियर और सैलरी

    इंटीरियर डिजाइनिंग क्या है? कोर्स, फीस, करियर और सैलरी

    Mithilesh KumarUpdated on 14 Sep 2026, 03:29 PM IST

    इंटीरियर डिजाइनिंग क्या है? यह एक रचनात्मक क्षेत्र है, जिसमें घर, ऑफिस, होटल, रेस्टोरेंट और अन्य स्थानों के अंदरूनी हिस्से को आकर्षक, सुविधाजनक और उपयोगी बनाने की योजना तैयार की जाती है। इंटीरियर डिजाइनर रंग, फर्नीचर, लाइटिंग, स्पेस प्लानिंग और सजावटी तत्वों का इस्तेमाल करके किसी जगह को बेहतर रूप देते हैं। इस क्षेत्र में रचनात्मकता के साथ तकनीकी ज्ञान और डिजाइनिंग स्किल्स की भी जरूरत होती है।

    This Story also Contains

    1. इंटीरियर डिजाइनिंग क्या है?
    2. इंटीरियर डिजाइनर क्या काम करता है?
    3. इंटीरियर डिजाइन और इंटीरियर डेकोरेशन में अंतर
    4. इंटीरियर डिजाइन के प्रकार
    5. इंटीरियर डिजाइनिंग में क्या-क्या काम करना होता है?
    6. इंटीरियर डिजाइनिंग के प्रमुख कोर्स
    7. कोर्स की अवधि कॉलेज के अनुसार अलग क्यों हो सकती है?
    8. 12वीं के बाद इंटीरियर डिजाइनिंग कैसे करें?
    9. 12वीं के बाद उपलब्ध कोर्स
    10. इंटीरियर डिजाइनिंग के लिए कौन-सी स्ट्रीम लेनी चाहिए?
    11. क्या साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स सभी स्टूडेंट्स इंटीरियर डिजाइनिंग कर सकते हैं?
    12. क्या इंटीरियर डिजाइनिंग के लिए प्रवेश परीक्षा देनी होती है?
    13. क्या डायरेक्ट एडमिशन का विकल्प होता है?
    14. इंटीरियर डिजाइनिंग कोर्स के लिए पात्रता मानदंड
    15. विषय संबंधी आवश्यकताएं
    16. इंटीरियर डिजाइनिंग में एडमिशन कैसे लें?
    17. इंटीरियर डिजाइनिंग की प्रवेश परीक्षाएं
    18. नाटा (NATA) और इंटीरियर डिजाइनिंग में अंतर
    19. विश्वविद्यालय-विशिष्ट प्रवेश परीक्षाएं
    20. इंटीरियर डिजाइनिंग कोर्स की फीस कितनी है?
    21. सरकारी कॉलेज में इंटीरियर डिजाइन की फीस
    22. प्राइवेट कॉलेज में इंटीरियर डिजाइन की फीस
    23. इंटीरियर डिजाइनिंग में अतिरिक्त खर्च
    24. इंटीरियर डिजाइनिंग के लिए जरूरी स्किल्स
    25. इंटीरियर डिजाइनिंग में कौन-कौन से सॉफ्टवेयर सीखें?
    26. कौन-सा सॉफ्टवेयर पहले सीखें?
    27. क्या इंटीरियर डिजाइनर बनने के लिए कोडिंग जरूरी है?
    28. इंटीरियर डिजाइनिंग में करियर विकल्प
    29. इंटीरियर डिजाइनर की सैलरी कितनी होती है?
    30. इंटीरियर डिजाइनर की सैलरी को प्रभावित करने वाले कारक
    31. भारत में टॉप इंटीरियर डिजाइन कॉलेज
    32. क्या इंटीरियर डिजाइनिंग एक अच्छा करियर है?
    33. इंटीरियर डिजाइनिंग को करियर के रूप में चुनने के फायदे और चुनौतियां
    इंटीरियर डिजाइनिंग क्या है? कोर्स, फीस, करियर और सैलरी
    इंटीरियर डिजाइनिंग क्या है

    इंटीरियर डिजाइनिंग में रुचि रखने वाले विद्यार्थी 12वीं के बाद डिप्लोमा, सर्टिफिकेट, बीए, बीएससी या बी.डिजाइन जैसे कोर्स कर सकते हैं। कोर्स की अवधि और फीस संस्थान व पाठ्यक्रम के अनुसार अलग-अलग होती है। कोर्स पूरा करने के बाद इंटीरियर डिजाइनर, इंटीरियर कंसल्टेंट, स्पेस प्लानर और फर्नीचर डिजाइनर जैसे करियर विकल्प मिलते हैं। इस लेख में इंटीरियर डिजाइनिंग के प्रमुख कोर्स, योग्यता, फीस, करियर विकल्प और सैलरी की जानकारी दी गई है।

    इंटीरियर डिजाइनिंग क्या है?

    इंटीरियर डिजाइनिंग की आसान भाषा में परिभाषा

    इंटीरियर डिजाइनिंग (Interior Designing) किसी घर, ऑफिस, होटल, रेस्टोरेंट, अस्पताल या अन्य इमारत के अंदर की जगह को इस तरह डिजाइन और व्यवस्थित करने की प्रक्रिया है, जिससे वह सुंदर, आरामदायक, सुरक्षित और उपयोगी बन सके। इसमें कमरे का लेआउट, फर्नीचर, रंग, लाइटिंग, सामग्री और उपलब्ध जगह का बेहतर इस्तेमाल करने की योजना बनाई जाती है।

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    सरल शब्दों में, इंटीरियर डिजाइनिंग का मतलब किसी जगह के अंदर उपलब्ध स्पेस का बेहतर तरीके से इस्तेमाल करते हुए उसके लुक और कार्यक्षमता को बेहतर बनाना है।

    इंटीरियर डिजाइनर क्या काम करता है?

    इंटीरियर डिजाइनर (Interior Designer) किसी प्रोजेक्ट की जरूरत, पसंद और बजट को समझकर उसके अनुसार डिजाइन तैयार करता है। उसके प्रमुख कामों में शामिल हैं:

    • जगह और स्पेस की जरूरतों का आकलन करना।

    • कमरे या पूरी इमारत का लेआउट तैयार करना।

    • फर्नीचर और अन्य सामान की सही जगह तय करना।

    • रंग, लाइटिंग और डिजाइन थीम का चयन करना।

    • फर्श, दीवारों और छत की सजावट के लिए उपयुक्त सामग्री चुनना।

    • 2डी ड्रॉइंग और 3डी डिजाइन या मॉडल तैयार करना।

    • ग्राहक के बजट और पसंद के अनुसार डिजाइन तैयार करना।

    • आर्किटेक्ट, इंजीनियर और ठेकेदार जैसे अन्य विशेषज्ञों के साथ काम करना।

    • प्रोजेक्ट के दौरान डिजाइन के अनुसार काम हो रहा है या नहीं, इसकी निगरानी करना।

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    इंटीरियर डिजाइन और इंटीरियर डेकोरेशन में अंतर

    इंटीरियर डिजाइन (Interior Design) और इंटीरियर डेकोरेशन (Interior Decoration) को अक्सर एक ही समझ लिया जाता है, लेकिन दोनों में अंतर है।

    आधार

    इंटीरियर डिजाइन

    इंटीरियर डेकोरेशन

    मुख्य उद्देश्य

    जगह को कार्यात्मक और आकर्षक बनाना

    जगह की खूबसूरती बढ़ाना

    काम का दायरा

    स्पेस प्लानिंग, लेआउट, लाइटिंग और फर्नीचर आदि

    रंग, पर्दे, फर्नीचर और सजावटी सामान आदि

    तकनीकी ज्ञान

    अपेक्षाकृत अधिक जरूरी

    सजावट और स्टाइलिंग पर अधिक जोर

    निर्माण में भूमिका

    जरूरत के अनुसार बदलाव और योजना में शामिल हो सकता है

    आमतौर पर मौजूदा जगह की सजावट तक सीमित

    विशेषज्ञ

    इंटीरियर डिजाइनर

    इंटीरियर डेकोरेटर

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    इंटीरियर डिजाइन के प्रकार

    इंटीरियर डिजाइनिंग को जगह और उसके उपयोग के आधार पर अलग-अलग प्रकारों में बांटा जा सकता है।

    1. आवासीय इंटीरियर डिजाइन (Residential Interior Design):
    घरों, अपार्टमेंट, विला और अन्य रहने की जगहों का इंटीरियर डिजाइन। इसमें बेडरूम, लिविंग रूम, किचन, डाइनिंग एरिया और बाथरूम आदि शामिल होते हैं।

    2. व्यावसायिक इंटीरियर डिजाइन (Commercial Interior Design):
    ऑफिस, दुकान, शोरूम, बैंक और अन्य व्यावसायिक स्थानों के लिए डिजाइन तैयार करना। इसमें जगह की ब्रांडिंग और ग्राहकों या कर्मचारियों की सुविधा पर भी ध्यान दिया जाता है।

    3. हॉस्पिटैलिटी इंटीरियर डिजाइन (Hospitality Interior Design):
    होटल, रिसॉर्ट, रेस्टोरेंट, कैफे और अन्य हॉस्पिटैलिटी स्थानों का इंटीरियर डिजाइन। इसमें ग्राहकों के अनुभव, आराम और आकर्षक वातावरण को प्राथमिकता दी जाती है।

    4. रिटेल इंटीरियर डिजाइन (Retail Interior Design):
    शॉपिंग मॉल, कपड़ों की दुकानों, ज्वेलरी स्टोर और अन्य रिटेल आउटलेट्स का डिजाइन। इसका उद्देश्य ग्राहकों के लिए बेहतर खरीदारी अनुभव के साथ उत्पादों को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित करना होता है।

    5. हेल्थकेयर इंटीरियर डिजाइन (Healthcare Interior Design):
    अस्पताल, क्लीनिक, मेडिकल सेंटर और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों के अंदरूनी स्थानों की डिजाइनिंग। इसमें स्वच्छता, सुरक्षा, मरीजों की सुविधा और कार्यक्षमता पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

    6. संस्थागत इंटीरियर डिजाइन (Institutional Interior Design):
    स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, लाइब्रेरी और अन्य संस्थानों के लिए इंटीरियर डिजाइन तैयार करना। इसमें विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों की जरूरतों के अनुसार स्पेस प्लानिंग की जाती है।

    इंटीरियर डिजाइनिंग में क्या-क्या काम करना होता है?

    इंटीरियर डिजाइनिंग में केवल किसी जगह को सुंदर बनाना ही शामिल नहीं है, बल्कि उपलब्ध जगह, ग्राहक की जरूरत, बजट और उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए पूरी डिजाइन प्रक्रिया तैयार करना भी शामिल है। एक इंटीरियर डिजाइनर को प्रोजेक्ट की शुरुआत से लेकर उसके पूरा होने तक कई तरह के काम करने पड़ते हैं।

    1. जगह की योजना बनाना (Space Planning)

    इंटीरियर डिजाइनर सबसे पहले उपलब्ध जगह का आकलन करता है और तय करता है कि कमरे, फर्नीचर और अन्य चीजों को किस तरह व्यवस्थित किया जाए। इसका उद्देश्य जगह का अधिकतम और सुविधाजनक उपयोग करना होता है।

    2. रंग, सामग्री और फर्नीचर का चयन

    डिजाइनर प्रोजेक्ट की जरूरत और थीम के अनुसार दीवारों के रंग, फर्श, लकड़ी, कपड़े, फर्नीचर और अन्य सामग्री का चयन करता है। इसमें जगह की उपयोगिता के साथ डिजाइन और ग्राहक की पसंद का भी ध्यान रखा जाता है।

    3. लाइटिंग डिजाइन

    जगह को बेहतर और आरामदायक बनाने के लिए उचित लाइटिंग की योजना तैयार करना भी इंटीरियर डिजाइनर के काम का हिस्सा है। इसमें प्राकृतिक रोशनी के साथ कृत्रिम रोशनी के स्थान, प्रकार और जरूरत के अनुसार व्यवस्था तय की जाती है।

    4. 2डी/3डी डिजाइन और विजुअलाइजेशन

    इंटीरियर डिजाइनर कंप्यूटर सॉफ्टवेयर की मदद से 2डी ड्रॉइंग और 3डी डिजाइन तैयार करता है। इससे ग्राहक को प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद जगह कैसी दिखाई देगी, इसका अनुमान लगाने में मदद मिलती है।

    5. ग्राहक की जरूरतों को समझना

    डिजाइन तैयार करने से पहले ग्राहक की पसंद, जरूरत, जीवनशैली, जगह के उपयोग और बजट को समझना जरूरी होता है। इसके आधार पर डिजाइनर ग्राहक के लिए उपयुक्त डिजाइन तैयार करता है।

    6. बजट और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट

    इंटीरियर डिजाइनर को प्रोजेक्ट के बजट का भी ध्यान रखना होता है। सामग्री, फर्नीचर, लाइटिंग और अन्य कामों पर होने वाले खर्च की योजना बनाना और प्रोजेक्ट को तय समय में पूरा कराने में सहयोग करना इसके महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

    7. ठेकेदार और विक्रेताओं के साथ समन्वय

    प्रोजेक्ट को जमीन पर लागू करने के लिए इंटीरियर डिजाइनर को ठेकेदारों, कारीगरों, फर्नीचर निर्माताओं और सामग्री विक्रेताओं के साथ समन्वय करना पड़ता है। डिजाइन के अनुसार काम हो रहा है या नहीं, इसकी निगरानी भी की जाती है।

    ये भी पढ़ें :एयर होस्टेस कैसे बनें? : योग्यता, कोर्स, फीस, चयन प्रक्रिया, सैलरी और करियर की पूरी जानकारी

    इंटीरियर डिजाइनिंग के प्रमुख कोर्स

    इंटीरियर डिजाइनिंग में रुचि रखने वाले विद्यार्थी अपनी शैक्षणिक योग्यता, करियर लक्ष्य और उपलब्ध समय के अनुसार सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, स्नातक (यूजी) और स्नातकोत्तर (पीजी) स्तर के कोर्स कर सकते हैं। कोर्स की अवधि संस्थान, पाठ्यक्रम की संरचना और पूर्णकालिक या अंशकालिक मोड के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। इसलिए नीचे दी गई अवधि को सामान्य अवधि के रूप में समझना चाहिए, न कि सभी कॉलेजों के लिए निश्चित अवधि।

    कोर्स

    सामान्य अवधि

    स्तर

    इंटीरियर डिजाइन में सर्टिफिकेट (Certificate in Interior Design)

    6 महीने–1 साल

    सर्टिफिकेट

    इंटीरियर डिजाइन में डिप्लोमा (Diploma in Interior Design)

    1–2 साल

    डिप्लोमा

    बी.डिजाइन इंटीरियर डिजाइन (B.Des Interior Design)

    4 साल

    यूजी

    बी.एससी. इंटीरियर डिजाइन (B.Sc Interior Design)

    3–4 साल

    यूजी

    बी.वोक इंटीरियर डिजाइन (B.Voc Interior Design)

    3–4 साल

    यूजी

    एम.डिजाइन इंटीरियर डिजाइन (M.Des Interior Design)

    2 साल

    पीजी

    कोर्स की अवधि कॉलेज के अनुसार अलग क्यों हो सकती है?

    इंटीरियर डिजाइनिंग के कोर्स की वास्तविक अवधि कॉलेज और संस्थान के अनुसार अलग हो सकती है। उदाहरण के लिए, कुछ संस्थान 6 महीने या 1 साल का सर्टिफिकेट कोर्स कराते हैं, जबकि किसी अन्य संस्थान में इसी स्तर का कार्यक्रम अलग अवधि का हो सकता है। इसी तरह डिप्लोमा कोर्स की अवधि आमतौर पर 1 से 2 साल के बीच होती है।

    स्नातक स्तर पर बी.डिजाइन (B.Des) जैसे नियमित डिग्री प्रोग्राम आमतौर पर 4 साल के होते हैं, जबकि कुछ बी.एससी. (B.Sc) या बी.वोक (B.Voc) कार्यक्रम 3 या 4 साल की अवधि के हो सकते हैं। स्नातकोत्तर स्तर पर एम.डिजाइन (M.Des) आमतौर पर 2 साल का होता है। किसी विशेष कॉलेज में आवेदन करने से पहले उसके आधिकारिक पाठ्यक्रम, अवधि और प्रवेश नियम जरूर जांचने चाहिए।

    ध्यान दें: सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स की अवधि में सबसे अधिक अंतर देखने को मिल सकता है। वहीं डिग्री कोर्स की अवधि विश्वविद्यालय के नियमों और कार्यक्रम की संरचना के अनुसार तय होती है। इसलिए करियर की योजना बनाते समय केवल कोर्स का नाम नहीं, बल्कि कॉलेज, मान्यता, पाठ्यक्रम, अवधि और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग को भी ध्यान में रखना चाहिए।

    ये भी पढ़ें : 10वीं के बाद होटल मैनेजमेंट कैसे करें? कोर्स, योग्यता, फीस, कॉलेज और करियर

    12वीं के बाद इंटीरियर डिजाइनिंग कैसे करें?

    12वीं के बाद इंटीरियर डिजाइनिंग में करियर बनाने के लिए विद्यार्थी अपनी रुचि और करियर लक्ष्य के अनुसार सर्टिफिकेट, डिप्लोमा या स्नातक डिग्री कोर्स चुन सकते हैं। जिन विद्यार्थियों को इस क्षेत्र में लंबे समय तक करियर बनाना है, उनके लिए बी.डिजाइन (B.Des), बी.एससी. (B.Sc) या बी.वोक (B.Voc) जैसे स्नातक पाठ्यक्रम विकल्प हो सकते हैं। वहीं, कम अवधि में कौशल सीखने के लिए सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स भी किए जा सकते हैं।

    12वीं के बाद उपलब्ध कोर्स

    12वीं के बाद इंटीरियर डिजाइनिंग के लिए प्रमुख विकल्प हैं:

    • बी.डिजाइन इंटीरियर डिजाइन (B.Des Interior Design) – आमतौर पर 4 वर्ष

    • बी.एससी. इंटीरियर डिजाइन (B.Sc Interior Design) – संस्थान के अनुसार 3–4 वर्ष

    • बी.वोक इंटीरियर डिजाइन (B.Voc Interior Design) – संस्थान के अनुसार 3–4 वर्ष

    • डिप्लोमा इन इंटीरियर डिजाइन – आमतौर पर 1–2 वर्ष

    • सर्टिफिकेट इन इंटीरियर डिजाइन – आमतौर पर 6 महीने–1 वर्ष

    कोर्स चुनने से पहले विद्यार्थी को कॉलेज की पात्रता, पाठ्यक्रम, फीस, प्रवेश प्रक्रिया और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग की जानकारी जरूर देखनी चाहिए।

    इंटीरियर डिजाइनिंग के लिए कौन-सी स्ट्रीम लेनी चाहिए?

    इंटीरियर डिजाइनिंग करने के लिए किसी एक विशेष स्ट्रीम को अनिवार्य नहीं माना जाता। हालांकि, अलग-अलग संस्थानों और कोर्स की पात्रता अलग हो सकती है। इसलिए 11वीं-12वीं में स्ट्रीम चुनते समय विद्यार्थी को अपने रुचि वाले कॉलेजों की पात्रता जरूर जांचनी चाहिए।

    आर्ट्स (Arts): डिजाइन, कला और रचनात्मक विषयों में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए उपयोगी हो सकती है।
    कॉमर्स (Commerce): बिजनेस, बजट और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए उपयोगी आधार दे सकती है।
    साइंस (Science): गणित और तकनीकी विषयों में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए उपयोगी हो सकती है।

    क्या साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स सभी स्टूडेंट्स इंटीरियर डिजाइनिंग कर सकते हैं?

    हां, कई इंटीरियर डिजाइनिंग कोर्स में साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स तीनों स्ट्रीम के विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, यह हर कॉलेज और कोर्स की पात्रता पर निर्भर करता है। कुछ संस्थान 12वीं में किसी भी स्ट्रीम से पास विद्यार्थियों को प्रवेश देते हैं, जबकि कुछ पाठ्यक्रमों में विशेष विषय या न्यूनतम अंक की शर्त हो सकती है।

    इसलिए केवल स्ट्रीम के आधार पर कॉलेज का चुनाव करने के बजाय संबंधित संस्थान की आधिकारिक पात्रता शर्तों को देखना जरूरी है।

    क्या इंटीरियर डिजाइनिंग के लिए प्रवेश परीक्षा देनी होती है?

    हर कोर्स और कॉलेज के लिए प्रवेश परीक्षा अनिवार्य नहीं होती। कुछ प्रतिष्ठित संस्थान प्रवेश परीक्षा, डिजाइन एप्टीट्यूड टेस्ट, ड्रॉइंग टेस्ट या पोर्टफोलियो के आधार पर प्रवेश दे सकते हैं। कुछ संस्थान अपनी प्रवेश प्रक्रिया में साक्षात्कार या अन्य चयन चरण भी शामिल कर सकते हैं।

    इसलिए बी.डिजाइन जैसे कोर्स में आवेदन करने से पहले संबंधित कॉलेज की प्रवेश प्रक्रिया जांचना जरूरी है।

    क्या डायरेक्ट एडमिशन का विकल्प होता है?

    कुछ कॉलेजों और संस्थानों में डायरेक्ट एडमिशन का विकल्प उपलब्ध हो सकता है। ऐसे संस्थान आमतौर पर 12वीं के अंकों या अपनी निर्धारित पात्रता के आधार पर प्रवेश देते हैं और प्रवेश परीक्षा अनिवार्य नहीं होती। हालांकि, डायरेक्ट एडमिशन की उपलब्धता, सीटों की संख्या और चयन प्रक्रिया संस्थान के अनुसार अलग-अलग होती है।

    महत्वपूर्ण: किसी भी कॉलेज में प्रवेश लेने से पहले उसकी मान्यता, कोर्स की अवधि, फीस, प्लेसमेंट, प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और प्रवेश नियमों की जानकारी आधिकारिक वेबसाइट से जरूर जांचें।

    ये भी पढ़ें :

    12वीं के बाद निफ्ट में एडमिशन कैसे लें? जानें योग्यता, परीक्षा, काउंसलिंग और पूरी प्रक्रिया

    इंटीरियर डिजाइनिंग कोर्स के लिए पात्रता मानदंड

    इंटीरियर डिजाइनिंग कोर्स की पात्रता संस्थान, कोर्स के स्तर और प्रवेश प्रक्रिया के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। 10वीं के बाद विद्यार्थी कुछ सर्टिफिकेट या डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश ले सकते हैं, जबकि स्नातक स्तर के कोर्स के लिए आमतौर पर 12वीं पास होना जरूरी होता है। स्नातकोत्तर कोर्स के लिए संबंधित विषय में स्नातक डिग्री की आवश्यकता हो सकती है।

    10वीं/12वीं की योग्यता

    • सर्टिफिकेट कोर्स: कुछ संस्थानों में 10वीं पास विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं।

    • डिप्लोमा कोर्स: कई संस्थान 10वीं या 12वीं पास विद्यार्थियों को प्रवेश देते हैं।

    • स्नातक कोर्स: बी.डिजाइन, बी.एससी. और बी.वोक जैसे कोर्स के लिए आमतौर पर 12वीं पास होना जरूरी होता है।

    • स्नातकोत्तर कोर्स: एम.डिजाइन जैसे कोर्स के लिए किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से स्नातक डिग्री जरूरी होती है।

    न्यूनतम अंक

    स्नातक और स्नातकोत्तर कोर्स में न्यूनतम अंकों की शर्त कॉलेज के अनुसार अलग हो सकती है। कई संस्थान 12वीं में एक निर्धारित न्यूनतम प्रतिशत मांगते हैं, जबकि कुछ संस्थान प्रवेश परीक्षा या अन्य चयन प्रक्रिया को भी महत्व देते हैं। इसलिए आवेदन से पहले संबंधित कॉलेज की पात्रता जांचना जरूरी है।

    विषय संबंधी आवश्यकताएं

    इंटीरियर डिजाइनिंग के लिए आमतौर पर किसी एक विशेष स्ट्रीम या विषय को अनिवार्य नहीं माना जाता। कई संस्थानों में आर्ट्स, कॉमर्स और साइंस तीनों स्ट्रीम से 12वीं पास विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, कुछ संस्थान विशेष विषयों की शर्त रख सकते हैं। इसलिए जिस कोर्स में प्रवेश लेना है, उसकी विषय संबंधी पात्रता पहले जांच लें।

    यूजी और पीजी पात्रता में अंतर

    आधार

    यूजी कोर्स

    पीजी कोर्स

    शैक्षणिक योग्यता

    12वीं पास

    स्नातक डिग्री

    सामान्य कोर्स

    बी.डिजाइन, बी.एससी., बी.वोक

    एम.डिजाइन

    स्ट्रीम

    कई संस्थानों में किसी भी स्ट्रीम से आवेदन संभव

    संस्थान के नियमों के अनुसार संबंधित या स्वीकृत स्नातक डिग्री

    प्रवेश प्रक्रिया

    मेरिट, प्रवेश परीक्षा या दोनों

    प्रवेश परीक्षा, मेरिट, पोर्टफोलियो या साक्षात्कार, संस्थान के अनुसार

    नोट: पात्रता और न्यूनतम अंकों की शर्त हर कॉलेज में अलग हो सकती है। इसलिए आवेदन करने से पहले संबंधित संस्थान की आधिकारिक पात्रता जरूर देखें।

    ये भी पढ़ें :

    इंटीरियर डिजाइनिंग में एडमिशन कैसे लें?

    इंटीरियर डिजाइनिंग कोर्स में प्रवेश लेने की प्रक्रिया कॉलेज और कोर्स के अनुसार अलग हो सकती है। सामान्य तौर पर विद्यार्थी इन चरणों का पालन कर सकते हैं:

    चरण 1: कोर्स चुनें

    सबसे पहले अपनी योग्यता और करियर लक्ष्य के अनुसार सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, बी.डिजाइन, बी.एससी., बी.वोक या एम.डिजाइन जैसे कोर्स में से विकल्प चुनें।

    चरण 2: पात्रता जांचें

    चुने गए कोर्स के लिए 10वीं, 12वीं या स्नातक में आवश्यक योग्यता, न्यूनतम अंक और विषय संबंधी शर्तों की जांच करें।

    चरण 3: प्रवेश परीक्षा दें, यदि लागू हो

    यदि कॉलेज या विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा के माध्यम से दाखिला देता है, तो निर्धारित परीक्षा के लिए आवेदन करें और परीक्षा में शामिल हों। कुछ डिजाइन संस्थान प्रवेश के दौरान रचनात्मक योग्यता या ड्रॉइंग से जुड़े परीक्षण भी ले सकते हैं।

    चरण 4: आवेदन फॉर्म भरें

    कॉलेज या विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन फॉर्म भरें। इसमें व्यक्तिगत जानकारी, शैक्षणिक विवरण और आवश्यक दस्तावेज जमा करने पड़ सकते हैं।

    चरण 5: पोर्टफोलियो/साक्षात्कार दें, यदि लागू हो

    कुछ संस्थान प्रवेश प्रक्रिया में पोर्टफोलियो (Portfolio), साक्षात्कार या अन्य चयन चरण शामिल कर सकते हैं। पोर्टफोलियो में विद्यार्थी के डिजाइन, ड्रॉइंग या रचनात्मक कार्यों के नमूने शामिल किए जा सकते हैं।

    चरण 6: काउंसलिंग/चयन प्रक्रिया पूरी करें

    प्रवेश परीक्षा या मेरिट के आधार पर चयन होने के बाद, जहां लागू हो, काउंसलिंग में भाग लें और उपलब्ध कॉलेज या कोर्स में सीट का चयन करें।

    चरण 7: कॉलेज में एडमिशन लें

    सीट मिलने के बाद निर्धारित समय में फीस जमा करें और जरूरी दस्तावेजों का सत्यापन कराकर प्रवेश प्रक्रिया पूरी करें। इसके बाद विद्यार्थी संबंधित इंटीरियर डिजाइनिंग कोर्स की पढ़ाई शुरू कर सकते हैं।

    ये भी पढ़ें :

    इंटीरियर डिजाइनिंग की प्रवेश परीक्षाएं

    इंटीरियर डिजाइनिंग में प्रवेश के लिए एक ही राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा सभी कॉलेजों में लागू नहीं होती। अलग-अलग संस्थान अपनी प्रवेश प्रक्रिया के अनुसार प्रवेश परीक्षा, ड्रॉइंग या डिजाइन एप्टीट्यूड टेस्ट, पोर्टफोलियो, साक्षात्कार या 12वीं के अंकों के आधार पर प्रवेश दे सकते हैं। इसलिए विद्यार्थी को जिस कॉलेज या कोर्स में प्रवेश लेना है, उसकी प्रवेश प्रक्रिया पहले जांचनी चाहिए।

    प्रवेश परीक्षा

    कोर्स/प्रवेश

    एनआईडी डीएटी (NID DAT)

    संबंधित डिजाइन कार्यक्रमों में प्रवेश

    निफ्ट (NIFT)

    संबंधित डिजाइन कार्यक्रमों में प्रवेश

    यूसीईईडी (UCEED)

    भाग लेने वाले संस्थानों में बी.डिजाइन (B.Des) प्रवेश

    नाटा (NATA)

    मुख्य रूप से आर्किटेक्चर से जुड़े पाठ्यक्रमों में प्रवेश

    विश्वविद्यालय-विशिष्ट प्रवेश परीक्षाएं

    संबंधित कॉलेज या विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार

    एनआईडी डीएटी (NID DAT)

    एनआईडी डीएटी (National Institute of Design – Design Aptitude Test) डिजाइन क्षेत्र में प्रवेश के लिए आयोजित की जाने वाली प्रवेश परीक्षा है। इसके माध्यम से एनआईडी और संबंधित डिजाइन कार्यक्रमों में प्रवेश मिलता है। हालांकि, इंटीरियर डिजाइनिंग के किसी विशेष कोर्स में एनआईडी डीएटी की स्वीकार्यता संस्थान और कार्यक्रम पर निर्भर करती है।

    निफ्ट (NIFT)

    निफ्ट (National Institute of Fashion Technology) की प्रवेश परीक्षा मुख्य रूप से फैशन और उससे जुड़े डिजाइन कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए होती है। निफ्ट के कुछ डिजाइन कार्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी स्पेस, सामग्री और डिजाइन से संबंधित कौशल भी विकसित कर सकते हैं। हालांकि, इसे सीधे तौर पर सभी इंटीरियर डिजाइनिंग कोर्स की प्रवेश परीक्षा नहीं माना जाना चाहिए।

    यूसीईईडी (UCEED)

    यूसीईईडी (Undergraduate Common Entrance Examination for Design) बी.डिजाइन (B.Des) में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा है। इसके स्कोर के आधार पर भाग लेने वाले संस्थानों में बी.डिजाइन में प्रवेश दिया जाता है। किसी संस्थान में इंटीरियर डिजाइन से संबंधित बी.डिजाइन कार्यक्रम उपलब्ध है या नहीं, यह आवेदन से पहले जांचना जरूरी है।

    नाटा (NATA) और इंटीरियर डिजाइनिंग में अंतर

    नाटा (National Aptitude Test in Architecture) मुख्य रूप से आर्किटेक्चर यानी वास्तुकला से जुड़े स्नातक कार्यक्रमों, विशेष रूप से बी.आर्क (B.Arch), में प्रवेश के लिए इस्तेमाल होता है। इसे इंटीरियर डिजाइनिंग की सामान्य प्रवेश परीक्षा समझना सही नहीं है।

    आर्किटेक्चर और इंटीरियर डिजाइनिंग अलग-अलग करियर क्षेत्र हैं। आर्किटेक्चर में इमारत की संरचना, डिजाइन, निर्माण और तकनीकी पहलुओं पर अधिक ध्यान दिया जाता है, जबकि इंटीरियर डिजाइनिंग में इमारत के अंदर के स्थान को कार्यात्मक, आरामदायक और आकर्षक बनाने पर जोर होता है। इसलिए इंटीरियर डिजाइनिंग करने वाले हर विद्यार्थी के लिए नाटा देना जरूरी नहीं है।

    विश्वविद्यालय-विशिष्ट प्रवेश परीक्षाएं

    कई विश्वविद्यालय और कॉलेज अपने स्तर पर प्रवेश परीक्षा आयोजित करते हैं। कुछ संस्थान बिना प्रवेश परीक्षा के मेरिट के आधार पर सीधे प्रवेश भी देते हैं। इसके अलावा कुछ कॉलेज पोर्टफोलियो, ड्रॉइंग टेस्ट या साक्षात्कार को चयन प्रक्रिया का हिस्सा बना सकते हैं।

    महत्वपूर्ण: किसी प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन करने से पहले यह जरूर जांचें कि वह आपके चुने हुए इंटीरियर डिजाइनिंग कोर्स और कॉलेज में मान्य है या नहीं। केवल परीक्षा का नाम देखकर आवेदन न करें।

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    इंटीरियर डिजाइनिंग कोर्स की फीस कितनी है?

    इंटीरियर डिजाइनिंग कोर्स की फीस संस्थान, कोर्स की अवधि, कॉलेज के प्रकार और सुविधाओं के अनुसार काफी अलग हो सकती है। इसलिए नीचे दी गई फीस को अनुमानित रेंज के रूप में देखना चाहिए। उपलब्ध 2026 के शुल्क-आंकड़ों के आधार पर सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स अपेक्षाकृत कम फीस में किए जा सकते हैं, जबकि स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्री की कुल फीस संस्थान के अनुसार कई लाख रुपये तक पहुंच सकती है।

    कोर्स

    अनुमानित फीस

    सर्टिफिकेट इन इंटीरियर डिजाइन

    ₹5,000–₹80,000

    डिप्लोमा इन इंटीरियर डिजाइन

    ₹30,000–₹3 लाख

    बी.डिजाइन इंटीरियर डिजाइन

    ₹2 लाख–₹18 लाख+

    बी.एससी. इंटीरियर डिजाइन

    ₹2 लाख–₹15 लाख

    बी.वोक इंटीरियर डिजाइन

    ₹2 लाख–₹6 लाख*

    एम.डिजाइन इंटीरियर डिजाइन

    ₹2 लाख–₹6 लाख

    *बी.वोक इंटीरियर डिजाइन की फीस संस्थान के अनुसार काफी बदल सकती है, इसलिए इसे व्यापक अनुमान के रूप में समझें। विभिन्न स्रोतों में एक ही कोर्स के लिए अलग-अलग शुल्क रेंज मिलती हैं।

    सरकारी कॉलेज में इंटीरियर डिजाइन की फीस

    सरकारी कॉलेजों और राज्य विश्वविद्यालयों में इंटीरियर डिजाइनिंग की फीस आमतौर पर निजी संस्थानों की तुलना में कम हो सकती है। हालांकि, सभी सरकारी संस्थानों में इंटीरियर डिजाइन का एक जैसा कोर्स या शुल्क ढांचा नहीं होता। डिप्लोमा या डिग्री कार्यक्रम की फीस संस्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। कुछ सरकारी संस्थानों में ट्यूशन फीस कम होने के बावजूद परीक्षा, स्टूडियो, सामग्री और अन्य शुल्क अलग से लिए जा सकते हैं।

    प्राइवेट कॉलेज में इंटीरियर डिजाइन की फीस

    प्राइवेट कॉलेजों में फीस आमतौर पर अधिक होती है, खासकर प्रतिष्ठित डिजाइन संस्थानों में। बी.डिजाइन या अन्य स्नातक कार्यक्रमों की कुल फीस कुछ संस्थानों में कुछ लाख रुपये से शुरू होकर ₹10 लाख से अधिक भी हो सकती है। उदाहरण के लिए, 2026 में कुछ संस्थानों के बी.डिजाइन कार्यक्रमों की वार्षिक फीस ₹1 लाख से अधिक है।

    इसलिए कॉलेज चुनते समय केवल ट्यूशन फीस नहीं, बल्कि पूरे कोर्स की कुल लागत देखना जरूरी है।

    इंटीरियर डिजाइनिंग में अतिरिक्त खर्च

    कोर्स की फीस के अलावा विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान कई अन्य खर्च भी करने पड़ सकते हैं:

    • डिजाइन सॉफ्टवेयर: ऑटोकैड, स्केचअप, 3डी मॉडलिंग और अन्य सॉफ्टवेयर के लाइसेंस या प्रशिक्षण पर खर्च हो सकता है।

    • लैपटॉप: 2डी ड्रॉइंग, 3डी मॉडलिंग और रेंडरिंग के लिए उपयुक्त क्षमता वाले लैपटॉप की जरूरत पड़ सकती है।

    • मटेरियल और मॉडल-मेकिंग: मॉडल, ड्रॉइंग शीट, कार्डबोर्ड, लकड़ी, फैब्रिक और अन्य डिजाइन सामग्री पर नियमित खर्च हो सकता है।

    • पोर्टफोलियो: प्रोजेक्ट प्रिंटिंग, मॉडल और प्रस्तुति सामग्री पर खर्च हो सकता है।

    • हॉस्टल और रहने का खर्च: दूसरे शहर में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को हॉस्टल, भोजन और यात्रा का खर्च भी जोड़ना चाहिए।

    इस तरह इंटीरियर डिजाइनिंग की वास्तविक लागत केवल कॉलेज की फीस तक सीमित नहीं होती। कोर्स चुनते समय ट्यूशन फीस के साथ स्टूडियो, सॉफ्टवेयर, सामग्री, लैपटॉप और रहने के खर्च को जोड़कर कुल बजट बनाना बेहतर रहता है।

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    इंटीरियर डिजाइनिंग के लिए जरूरी स्किल्स

    इंटीरियर डिजाइनिंग में सफल करियर बनाने के लिए केवल डिजाइनिंग की जानकारी होना पर्याप्त नहीं है। एक अच्छे इंटीरियर डिजाइनर के पास रचनात्मक सोच, तकनीकी समझ, संवाद कौशल और प्रोजेक्ट को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने की क्षमता भी होनी चाहिए। इस क्षेत्र में करियर बनाने वाले विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान इन स्किल्स को विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए।

    1. रचनात्मकता (Creativity)

    इंटीरियर डिजाइनिंग एक रचनात्मक क्षेत्र है। डिजाइनर को अलग-अलग जगहों के लिए नए और आकर्षक डिजाइन आइडिया तैयार करने होते हैं। अलग-अलग रंग, सामग्री, फर्नीचर और डिजाइन शैलियों को मिलाकर बेहतर परिणाम देने की क्षमता महत्वपूर्ण है।

    2. स्पेस की समझ (Spatial Understanding)

    उपलब्ध जगह का सही इस्तेमाल करना इंटीरियर डिजाइनिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। डिजाइनर को यह समझना आना चाहिए कि किसी कमरे या इमारत में फर्नीचर और अन्य चीजों को किस तरह व्यवस्थित किया जाए, ताकि जगह सुविधाजनक और कार्यात्मक बनी रहे।

    3. ड्रॉइंग और स्केचिंग (Drawing/Sketching)

    इंटीरियर डिजाइनर को अपने डिजाइन आइडिया को स्केच या ड्रॉइंग के माध्यम से समझाने में सक्षम होना चाहिए। हाथ से स्केचिंग की बुनियादी जानकारी के साथ 2डी और 3डी डिजाइन सॉफ्टवेयर का ज्ञान भी उपयोगी होता है।

    4. रंगों की समझ (Colour Sense)

    अलग-अलग रंग किसी जगह के माहौल और लुक को प्रभावित करते हैं। इसलिए डिजाइनर को रंगों के संयोजन, कंट्रास्ट और अलग-अलग जगहों के लिए उपयुक्त रंग चुनने की समझ होनी चाहिए।

    5. कम्युनिकेशन स्किल्स (Communication Skills)

    इंटीरियर डिजाइनर को ग्राहकों की जरूरतों को समझना और अपने डिजाइन आइडिया को स्पष्ट रूप से समझाना होता है। इसके अलावा उसे आर्किटेक्ट, इंजीनियर, ठेकेदार, कारीगर और विक्रेताओं के साथ भी प्रभावी ढंग से संवाद करना पड़ता है।

    6. समस्या समाधान की क्षमता (Problem-Solving)

    हर प्रोजेक्ट में अलग-अलग चुनौतियां आ सकती हैं, जैसे सीमित जगह, बजट की समस्या या ग्राहक की बदलती जरूरतें। ऐसे में डिजाइनर को व्यावहारिक और रचनात्मक तरीके से समाधान निकालना आना चाहिए।

    7. प्रोजेक्ट मैनेजमेंट (Project Management)

    एक इंटीरियर प्रोजेक्ट को समय और बजट के भीतर पूरा करने के लिए योजना बनाना, काम की निगरानी करना और अलग-अलग लोगों के साथ समन्वय करना जरूरी है। इसलिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट की बुनियादी समझ महत्वपूर्ण स्किल है।

    8. बुनियादी तकनीकी जानकारी (Basic Technical Knowledge)

    इंटीरियर डिजाइनर को निर्माण से जुड़े कुछ बुनियादी तकनीकी पहलुओं की जानकारी होनी चाहिए। इसमें माप, ड्रॉइंग, सामग्री, फर्नीचर, इलेक्ट्रिकल और लाइटिंग से जुड़ी सामान्य जानकारी शामिल हो सकती है।

    9. 3डी विजुअलाइजेशन (3D Visualization)

    3डी विजुअलाइजेशन की मदद से डिजाइनर किसी जगह का तैयार होने के बाद का संभावित रूप दिखा सकता है। इसलिए 3डी मॉडलिंग और रेंडरिंग सॉफ्टवेयर की बुनियादी समझ डिजाइन विद्यार्थियों और प्रोफेशनल्स के लिए काफी उपयोगी होती है।

    इंटीरियर डिजाइनिंग में कौन-कौन से सॉफ्टवेयर सीखें?

    इंटीरियर डिजाइनिंग में डिजाइन तैयार करने, 2डी ड्रॉइंग बनाने, 3डी मॉडलिंग, रेंडरिंग और प्रेजेंटेशन के लिए अलग-अलग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाता है। सभी सॉफ्टवेयर एक साथ सीखना जरूरी नहीं है। विद्यार्थी पहले बुनियादी डिजाइन और ड्रॉइंग सॉफ्टवेयर सीखकर धीरे-धीरे 3डी मॉडलिंग और रेंडरिंग टूल्स पर पकड़ बना सकते हैं।

    सॉफ्टवेयर

    मुख्य उपयोग

    ऑटोकैड (AutoCAD)

    2डी ड्रॉइंग, फ्लोर प्लान, लेआउट और तकनीकी ड्रॉइंग

    स्केचअप (SketchUp)

    3डी मॉडलिंग और इंटीरियर स्पेस का मॉडल तैयार करना

    3डी मैक्स (3ds Max)

    विस्तृत 3डी मॉडलिंग, डिजाइन और विजुअलाइजेशन

    रीविट (Revit)

    बिल्डिंग मॉडलिंग और डिजाइन से जुड़े कार्यों के लिए

    वी-रे (V-Ray)

    3डी डिजाइन की रियलिस्टिक रेंडरिंग और विजुअलाइजेशन

    एडोबी फोटोशॉप (Adobe Photoshop)

    डिजाइन में इमेज एडिटिंग, टेक्सचर और प्रेजेंटेशन तैयार करना

    एडोबी इलस्ट्रेटर (Adobe Illustrator)

    ग्राफिक डिजाइन, प्रेजेंटेशन और वेक्टर आधारित डिजाइन तैयार करना

    कौन-सा सॉफ्टवेयर पहले सीखें?

    शुरुआत करने वाले विद्यार्थियों के लिए ऑटोकैड और स्केचअप से शुरुआत करना उपयोगी हो सकता है। इसके बाद जरूरत के अनुसार 3डी मैक्स, वी-रे या रीविट जैसे सॉफ्टवेयर सीखे जा सकते हैं। फोटोशॉप और इलस्ट्रेटर डिजाइन प्रेजेंटेशन और विजुअल कम्युनिकेशन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।

    हालांकि, किसी एक सॉफ्टवेयर में विशेषज्ञता हासिल करना सभी के लिए जरूरी नहीं है। करियर के दौरान जिस तरह के प्रोजेक्ट पर काम करना हो, उसके अनुसार सॉफ्टवेयर का चयन किया जा सकता है।

    क्या इंटीरियर डिजाइनर बनने के लिए कोडिंग जरूरी है?

    नहीं, इंटीरियर डिजाइनर बनने के लिए कोडिंग जरूरी नहीं है। इस क्षेत्र में डिजाइनिंग, स्पेस प्लानिंग, ड्रॉइंग, 3डी विजुअलाइजेशन, रंगों की समझ और क्लाइंट कम्युनिकेशन जैसी स्किल्स अधिक महत्वपूर्ण हैं।

    हालांकि, अगर किसी विद्यार्थी को कंप्यूटर और तकनीक में रुचि है, तो बुनियादी कोडिंग या डिजिटल टूल्स की जानकारी अतिरिक्त कौशल के रूप में उपयोगी हो सकती है।

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    इंटीरियर डिजाइनिंग में करियर विकल्प

    इंटीरियर डिजाइनिंग का कोर्स करने के बाद विद्यार्थियों के लिए केवल इंटीरियर डिजाइनर के रूप में काम करने तक ही सीमित विकल्प नहीं होते। वे अपनी रुचि और विशेषज्ञता के अनुसार आवासीय, व्यावसायिक, रिटेल, हॉस्पिटैलिटी, फर्नीचर, लाइटिंग और 3डी विजुअलाइजेशन जैसे क्षेत्रों में करियर बना सकते हैं। प्रमुख करियर विकल्प इस प्रकार हैं:

    1. इंटीरियर डिजाइनर (Interior Designer)

    ग्राहक की जरूरत, बजट और उपलब्ध जगह के अनुसार इंटीरियर डिजाइन तैयार करना और प्रोजेक्ट को लागू कराने में सहयोग करना।

    2. आवासीय इंटीरियर डिजाइनर (Residential Interior Designer)

    घर, अपार्टमेंट, विला और अन्य रहने की जगहों के लिए डिजाइन तैयार करना। इसमें बेडरूम, किचन, लिविंग रूम आदि की डिजाइनिंग शामिल होती है।

    3. व्यावसायिक इंटीरियर डिजाइनर (Commercial Interior Designer)

    ऑफिस, शोरूम, बैंक, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक स्थानों के इंटीरियर पर काम करना।

    4. रिटेल डिजाइनर (Retail Designer)

    दुकानों, शोरूम और रिटेल स्टोर की ऐसी डिजाइन तैयार करना, जिससे जगह का बेहतर उपयोग हो और ग्राहकों को अच्छा अनुभव मिले।

    5. हॉस्पिटैलिटी डिजाइनर (Hospitality Designer)

    होटल, रिसॉर्ट, कैफे और रेस्टोरेंट जैसे स्थानों के इंटीरियर की योजना और डिजाइन तैयार करना।

    6. सेट डिजाइनर (Set Designer)

    फिल्म, टेलीविजन, थिएटर और विज्ञापनों के लिए सेट की डिजाइन और दृश्य संरचना तैयार करना।

    7. प्रदर्शनी डिजाइनर (Exhibition Designer)

    प्रदर्शनी, मेले, संग्रहालय और इवेंट के लिए स्टॉल, डिस्प्ले एरिया और विजिटर स्पेस की डिजाइनिंग करना।

    8. फर्नीचर डिजाइनर (Furniture Designer)

    कुर्सी, टेबल, सोफा, बेड और अन्य फर्नीचर के नए डिजाइन तैयार करना। इसमें उपयोगिता, आराम और डिजाइन का संतुलन महत्वपूर्ण होता है।

    9. लाइटिंग डिजाइनर (Lighting Designer)

    किसी स्थान के लिए लाइटिंग की योजना तैयार करना और यह तय करना कि किस जगह किस प्रकार की रोशनी का इस्तेमाल किया जाए।

    10. 3डी विजुअलाइजर (3D Visualizer)

    इंटीरियर डिजाइन को 3डी मॉडल और रेंडरिंग के रूप में तैयार करना, ताकि ग्राहक को प्रोजेक्ट का संभावित अंतिम रूप दिखाया जा सके।

    11. इंटीरियर स्टाइलिस्ट (Interior Stylist)

    किसी जगह के लुक और माहौल को बेहतर बनाने के लिए फर्नीचर, रंग, सजावटी वस्तुओं, कपड़ों और अन्य डिजाइन तत्वों का चयन और संयोजन करना।

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    इंटीरियर डिजाइनर की सैलरी कितनी होती है?

    इंटीरियर डिजाइनर की सैलरी अनुभव, नौकरी की लोकेशन, कंपनी, विशेषज्ञता और स्किल्स के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। शुरुआत में भारत में इंटीरियर डिजाइनर का वेतन अपेक्षाकृत कम हो सकता है, लेकिन अनुभव और मजबूत पोर्टफोलियो के साथ कमाई के अवसर बढ़ते हैं। नीचे दी गई सैलरी अनुमानित वार्षिक पैकेज (एलपीए) है; वास्तविक वेतन कंपनी और उम्मीदवार की प्रोफाइल के अनुसार अलग हो सकता है।

    अनुभव

    अनुमानित सैलरी रेंज

    फ्रेशर

    ₹2.5–5 लाख प्रति वर्ष

    2–5 वर्ष

    ₹4–8 लाख प्रति वर्ष

    5+ वर्ष

    ₹7–15 लाख+ प्रति वर्ष


    इंटीरियर डिजाइनर की सैलरी को प्रभावित करने वाले कारक

    1. अनुभव
    अनुभव बढ़ने के साथ डिजाइन प्रोजेक्ट संभालने, क्लाइंट से बातचीत और टीम मैनेजमेंट की क्षमता विकसित होती है, जिसका असर सैलरी पर पड़ सकता है।

    2. लोकेशन
    दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और अन्य बड़े शहरों में डिजाइन से जुड़े अवसर और वेतन छोटे शहरों की तुलना में अलग हो सकते हैं।

    3. कंपनी
    बड़ी डिजाइन फर्म, आर्किटेक्चर कंपनियों, रियल एस्टेट कंपनियों और स्थापित ब्रांड्स में सैलरी का स्तर कंपनी, भूमिका और उम्मीदवार के अनुभव के अनुसार अलग हो सकता है।

    4. विशेषज्ञता (Specialisation)
    आवासीय, व्यावसायिक, हॉस्पिटैलिटी, रिटेल, लाइटिंग या फर्नीचर डिजाइन जैसे किसी विशेष क्षेत्र में विशेषज्ञता होने से करियर के अवसर बढ़ सकते हैं।

    5. सॉफ्टवेयर स्किल्स
    ऑटोकैड, स्केचअप, 3डी मैक्स, रीविट, वी-रे और अन्य डिजाइन सॉफ्टवेयर पर अच्छी पकड़ उम्मीदवार की प्रोफाइल को मजबूत कर सकती है।

    6. पोर्टफोलियो
    इंटीरियर डिजाइनिंग में पोर्टफोलियो बहुत महत्वपूर्ण है। इसमें विद्यार्थी या डिजाइनर के अच्छे प्रोजेक्ट, 2डी ड्रॉइंग, 3डी मॉडल, रेंडर और डिजाइन कॉन्सेप्ट शामिल हो सकते हैं। मजबूत पोर्टफोलियो नौकरी या क्लाइंट हासिल करने में मदद कर सकता है।

    7. फ्रीलांसिंग और अपना बिजनेस
    इंटीरियर डिजाइनर नौकरी के अलावा फ्रीलांस प्रोजेक्ट ले सकते हैं या अपना डिजाइन स्टूडियो शुरू कर सकते हैं। इस स्थिति में आय निश्चित मासिक सैलरी के बजाय प्रोजेक्ट, क्लाइंट, फीस और काम की मात्रा पर निर्भर करती है। अनुभवी डिजाइनर बड़े प्रोजेक्ट लेकर अपनी कमाई बढ़ा सकते हैं।

    भारत में टॉप इंटीरियर डिजाइन कॉलेज

    भारत में इंटीरियर डिजाइनिंग के लिए कई प्रतिष्ठित संस्थान हैं। इनमें कुछ कॉलेज सीधे इंटीरियर डिजाइन की डिग्री देते हैं, जबकि कुछ में इंटीरियर आर्किटेक्चर, स्पेस डिजाइन या इंटीरियर एंड रिटेल स्पेसेज जैसे संबंधित कार्यक्रम उपलब्ध हैं। Careers360 की 2026 सूची में सीईपीटी यूनिवर्सिटी, पर्ल एकेडमी, सृष्टि मणिपाल, यूआईडी अहमदाबाद, अनंत नेशनल यूनिवर्सिटी और एमएसएपी मणिपाल जैसे संस्थान शामिल हैं।

    कॉलेज/संस्थान

    शहर

    प्रमुख कोर्स

    प्रवेश

    अनुमानित फीस*

    सीईपीटी यूनिवर्सिटी

    अहमदाबाद

    इंटीरियर/स्पेस डिजाइन से जुड़े कार्यक्रम

    संस्थान की प्रवेश प्रक्रिया

    कोर्स के अनुसार

    पर्ल एकेडमी

    मुंबई

    बी.डिजाइन इंटीरियर आर्किटेक्चरल डिजाइन

    जीपीटी + डीएटी

    संस्थान के अनुसार

    सृष्टि मणिपाल इंस्टीट्यूट

    बेंगलुरु

    डिजाइन से जुड़े यूजी कार्यक्रम

    संस्थान की प्रवेश प्रक्रिया

    संस्थान के अनुसार

    यूआईडी अहमदाबाद

    अहमदाबाद

    इंटीरियर डिजाइन से जुड़े डिजाइन कार्यक्रम

    संस्थान की प्रवेश प्रक्रिया

    संस्थान के अनुसार

    अनंत नेशनल यूनिवर्सिटी

    अहमदाबाद

    बी.डिजाइन स्पेस डिजाइन

    एडीईपीटी

    करीब ₹18.01 लाख

    एमएसएपी, मणिपाल

    मणिपाल

    बी.डिजाइन इंटीरियर डिजाइन

    एचबीटी + पोर्टफोलियो

    करीब ₹9.04 लाख

    स्कूल ऑफ डिजाइन, यूपीईएस

    देहरादून

    बी.डिजाइन इंटीरियर एंड रिटेल स्पेसेज

    डिजाइन प्रवेश परीक्षा/पोर्टफोलियो

    करीब ₹20.35 लाख

    वर्ल्ड यूनिवर्सिटी ऑफ डिजाइन

    सोनीपत

    बी.डिजाइन इंटीरियर आर्किटेक्चर एंड डिजाइन

    एप्टीट्यूड टेस्ट + इंटरव्यू

    करीब ₹12.80 लाख

    आयोजन स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर

    जयपुर

    बी.डिजाइन इंटीरियर डिजाइन

    एआईईईडी

    करीब ₹8 लाख

    एसीएफए जालंधर

    जालंधर

    बी.डिजाइन इंटीरियर

    संस्थान की प्रवेश प्रक्रिया

    करीब ₹4.22 लाख

    एमिटी यूनिवर्सिटी

    नोएडा

    बी.डिजाइन इंटीरियर

    संस्थान की प्रवेश प्रक्रिया

    करीब ₹20.35 लाख

    *फीस उपलब्ध संस्थागत/कॉलेज डेटा के आधार पर अनुमानित कुल फीस है और समय के साथ बदल सकती है। आवेदन से पहले संबंधित संस्थान की नवीनतम फीस जरूर जांचें। Careers360 के अनुसार भारत के शीर्ष बी.डिजाइन इंटीरियर डिजाइन कॉलेजों की फीस लगभग ₹3 लाख से ₹22 लाख तक हो सकती है। भारत में बी.डिजाइन इंटीरियर डिजाइन कॉलेज चेक कर सकते हैं।

    क्या इंटीरियर डिजाइनिंग एक अच्छा करियर है?

    इंटीरियर डिजाइनिंग उन विद्यार्थियों के लिए एक अच्छा करियर विकल्प हो सकता है, जिन्हें रचनात्मक काम, डिजाइन, रंग, स्पेस प्लानिंग और लोगों की जरूरतों को समझकर समाधान तैयार करने में रुचि है। घरों और व्यावसायिक स्थानों के अलावा होटल, रेस्टोरेंट, रिटेल स्टोर और ऑफिस जैसे क्षेत्रों में भी इंटीरियर डिजाइन की जरूरत होती है। इस क्षेत्र में नौकरी के साथ-साथ फ्रीलांसिंग और अपना डिजाइन स्टूडियो या बिजनेस शुरू करने के अवसर भी मिलते हैं।

    हालांकि, इसे ऐसा करियर नहीं माना जाना चाहिए जिसमें शुरुआत से ही बहुत अधिक सैलरी मिलती है। फ्रेशर्स की शुरुआती कमाई सीमित हो सकती है और अच्छे अवसर पाने के लिए मजबूत पोर्टफोलियो, सॉफ्टवेयर स्किल्स और प्रैक्टिकल अनुभव महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा, 3डी डिजाइन, रेंडरिंग और एआई जैसे तकनीकी टूल्स इंटीरियर डिजाइनिंग के काम करने के तरीके को बदल रहे हैं। इसलिए डिजाइनरों को नई तकनीक के साथ लगातार अपनी स्किल्स अपडेट करनी होंगी। लंबे समय में विशेषज्ञता, अनुभव, बेहतर पोर्टफोलियो और क्लाइंट नेटवर्क के आधार पर इस क्षेत्र में अच्छी ग्रोथ हासिल की जा सकती है।

    इंटीरियर डिजाइनिंग को करियर के रूप में चुनने के फायदे और चुनौतियां

    पहलू

    क्या समझें?

    बढ़ती मांग

    आवासीय और व्यावसायिक दोनों क्षेत्रों में डिजाइनिंग सेवाओं की जरूरत होती है।

    रचनात्मक करियर

    डिजाइन, रंग, फर्नीचर और स्पेस के साथ रचनात्मक रूप से काम करने का अवसर मिलता है।

    फ्रीलांसिंग/बिजनेस

    नौकरी के अलावा फ्रीलांस प्रोजेक्ट या अपना डिजाइन स्टूडियो शुरू किया जा सकता है।

    शुरुआती सैलरी

    फ्रेशर्स को शुरुआत में सीमित वेतन मिल सकता है; अनुभव के साथ कमाई बढ़ सकती है।

    पोर्टफोलियो

    नौकरी और क्लाइंट हासिल करने में मजबूत पोर्टफोलियो महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    तकनीक और एआई

    3डी मॉडलिंग, रेंडरिंग और एआई टूल्स डिजाइन प्रक्रिया को अधिक डिजिटल बना रहे हैं।

    लंबी अवधि की ग्रोथ

    विशेषज्ञता, अनुभव, सॉफ्टवेयर स्किल्स और क्लाइंट नेटवर्क बढ़ने के साथ करियर के अवसर बेहतर हो सकते हैं।

    अगर आपको केवल अच्छी सैलरी के बजाय रचनात्मकता, डिजाइनिंग और प्रोजेक्ट-आधारित काम में वास्तविक रुचि है, तो इंटीरियर डिजाइनिंग एक अच्छा करियर विकल्प हो सकता है। लेकिन इस क्षेत्र में सफल होने के लिए डिग्री के साथ पोर्टफोलियो, सॉफ्टवेयर स्किल्स, प्रैक्टिकल अनुभव और बदलती तकनीक सीखने की क्षमता भी जरूरी है।

    ये भी पढ़ें : 12वीं के बाद मर्चेंट नेवी कैसे जॉइन करें? कोर्स, योग्यता, एग्जाम, फीस और सैलरी

    इंटीरियर डिजाइन और आर्किटेक्चर में क्या अंतर है?

    आर्किटेक्चर मुख्य रूप से इमारत की संरचना, निर्माण और वास्तु डिजाइन से संबंधित है, जबकि इंटीरियर डिजाइनिंग इमारत के अंदर की जगह को कार्यात्मक, आरामदायक और आकर्षक बनाने पर केंद्रित होती है। दोनों अलग-अलग करियर क्षेत्र हैं और इनके कोर्स व प्रवेश प्रक्रियाएं भी अलग हो सकती हैं।


    Frequently Asked Questions (FAQs)

    Q: 12वीं के बाद इंटीरियर डिजाइनर कैसे बनें?
    A:

    12वीं के बाद बी.डिजाइन (B.Des), बी.एससी. (B.Sc), बी.वोक (B.Voc), डिप्लोमा या सर्टिफिकेट जैसे कोर्स कर सकते हैं। इसके बाद इंटर्नशिप और प्रैक्टिकल अनुभव के साथ पोर्टफोलियो तैयार करके इंटीरियर डिजाइनिंग में करियर शुरू किया जा सकता है।

    Q: इंटीरियर डिजाइनिंग कोर्स कितने साल का होता है?
    A:

    कोर्स के अनुसार अवधि अलग होती है। सर्टिफिकेट कोर्स आमतौर पर 6 महीने से 1 साल, डिप्लोमा 1–2 साल, स्नातक डिग्री लगभग 3–4 साल और एम.डिजाइन (M.Des) आमतौर पर 2 साल का हो सकता है।

    Q: इंटीरियर डिजाइनर बनने के लिए कौन-सी पढ़ाई करनी चाहिए?
    A:

    12वीं के बाद इंटीरियर डिजाइन में बी.डिजाइन, बी.एससी., बी.वोक, डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स किया जा सकता है। आगे विशेषज्ञता के लिए संबंधित क्षेत्र में स्नातकोत्तर कोर्स भी किया जा सकता है।

    Q: क्या आर्ट्स के बाद इंटीरियर डिजाइनिंग कर सकते हैं?
    A:

    हां, कई इंटीरियर डिजाइनिंग कोर्स में आर्ट्स स्ट्रीम के विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, पात्रता संस्थान और कोर्स के अनुसार अलग हो सकती है।

    Q: क्या इंटीरियर डिजाइनिंग के लिए मैथ्स जरूरी है?
    A:

    इंटीरियर डिजाइनिंग के लिए हर कोर्स में मैथ्स अनिवार्य नहीं है। हालांकि, माप, अनुपात, क्षेत्रफल और स्पेस प्लानिंग जैसे कामों के लिए बुनियादी गणित की समझ उपयोगी होती है। कुछ संस्थानों के विशेष कोर्स में मैथ्स से जुड़ी पात्रता हो सकती है।

    Q: क्या इंटीरियर डिजाइनर बनने के लिए ड्रॉइंग आना जरूरी है?
    A:

    ड्रॉइंग और स्केचिंग की अच्छी समझ इंटीरियर डिजाइनिंग में उपयोगी है, लेकिन शुरुआत से ही बहुत अच्छा कलाकार होना जरूरी नहीं है। कोर्स के दौरान स्केचिंग, तकनीकी ड्रॉइंग और डिजाइन सॉफ्टवेयर का अभ्यास किया जा सकता है।

    Q: इंटीरियर डिजाइनिंग के लिए कौन-सा कोर्स सबसे अच्छा है?
    A:

    यह विद्यार्थी के करियर लक्ष्य पर निर्भर करता है। लंबे समय के करियर के लिए बी.डिजाइन, बी.एससी. या बी.वोक जैसे स्नातक कोर्स विकल्प हो सकते हैं, जबकि कम अवधि में कौशल सीखने के लिए डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स किया जा सकता है।

    Q: इंटीरियर डिजाइनिंग के लिए कौन-से सॉफ्टवेयर सीखने चाहिए?
    A:

    इंटीरियर डिजाइनिंग में ऑटोकैड (AutoCAD), स्केचअप (SketchUp), 3डी मैक्स (3ds Max), रीविट (Revit), वी-रे (V-Ray), एडोबी फोटोशॉप (Adobe Photoshop) और एडोबी इलस्ट्रेटर (Adobe Illustrator) जैसे सॉफ्टवेयर उपयोगी हैं। शुरुआत में ऑटोकैड और स्केचअप जैसे टूल्स सीखना उपयोगी हो सकता है।

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    Basic 3D Modeling using Blender
    Via Indian Institute of Technology Bombay
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    Questions related to NIFT Entrance Exam

    On Question asked by student community

    Have a question related to NIFT Entrance Exam ?

    If your NIFT B.Des. entrance exam is approaching, focus on revision rather than learning new topics.

    • Revise design principles, colour theory, perspective, and composition.
    • Practise quick sketches within a time limit.
    • Solve previous years' question papers to understand the exam pattern.
    • Improve observation skills by sketching everyday objects.
    • Carry all

    HELLO,

    I am providing you the link below through which you will be able to download the NIFT Question papers with solutions PDF

    Here is the link :-

    https://design.careers360.com/articles/nift-question-paper

    In the above link , you will get the direct links to download the year vise question papers with solutions ,

    Hello,

    Yes, a diploma holder in Computer Engineering can apply for the NIFT entrance exam , but only through the lateral entry route.

    NIFT allows candidates with a 3-year or 4-year engineering diploma from a recognized board to apply for B.F.Tech (Fashion Technology) through lateral entry. The diploma must be